Friday, December 5, 2025

आकाश व्यापक निळे



अशी असावी किर्ती
असे नरविर व्हावे!
हरेक वंचिताचा
तुजसम धीर व्हावे!

तु रुजवली समता
देश चाखतो फळे
भुई मोजते आमूची
आकाश व्यापक निळे!

बा! भीमा! तूला शब्दार्पण!


                  ("やaraτa ₱)                           
www.prataprachana.blogspot.com


















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