भिजल्या दवांच्या
गवत रजईवर
हळुवार पाय पसरत फकीर
विचारतो आहे....
साद देतो आहेस आर्त
क्या ओ मुकर गयी?
वैसे कौन थी वो?
कहा ओ चली गयी?
बाबा! रहने भी दो...
बहाव को कौन रोकता है?
नदी थी, बहना जानती थी ।
लाख कोशिशों के बाद
कहाँ ओ मानती थी ।........मी
फकीर - मग का बसला आहेस तु?
ही स्थितप्रज्ञता धारून..?
मी : बाबा! आपने कभी नदी को
दरिया से मिलते देखा है?
फकिर- तेरा मतलब ?
मी : उसकी याद को मै
ज़रिया बना रहा हूँ,
खुद को ही मै अब
दरिया बना रहा हूँ ।
फकीर - मुकर्रर ।
༄᭄प्रताप ࿐
"रचनापर्व"
www.prataprachana.blogspot.com
२२.०९. २०२२
गवत रजईवर
हळुवार पाय पसरत फकीर
विचारतो आहे....
साद देतो आहेस आर्त
क्या ओ मुकर गयी?
वैसे कौन थी वो?
कहा ओ चली गयी?
बाबा! रहने भी दो...
बहाव को कौन रोकता है?
नदी थी, बहना जानती थी ।
लाख कोशिशों के बाद
कहाँ ओ मानती थी ।........मी
फकीर - मग का बसला आहेस तु?
ही स्थितप्रज्ञता धारून..?
मी : बाबा! आपने कभी नदी को
दरिया से मिलते देखा है?
फकिर- तेरा मतलब ?
मी : उसकी याद को मै
ज़रिया बना रहा हूँ,
खुद को ही मै अब
दरिया बना रहा हूँ ।
फकीर - मुकर्रर ।
༄᭄प्रताप ࿐
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२२.०९. २०२२
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